UPI New Rules – नवंबर महीने से UPI लेनदेन से जुड़े कई महत्वपूर्ण नियमों में बदलाव किए गए हैं, जिनका सीधा असर PhonePe, Google Pay, Paytm सहित सभी प्रमुख डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म यूजर्स पर पड़ेगा। डिजिटल पेमेंट के बढ़ते उपयोग और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नई गाइडलाइंस लागू की गई हैं, ताकि यूजर्स बिना किसी रुकावट और जोखिम के लेनदेन कर सकें। नए नियमों में ट्रांजैक्शन लिमिट से लेकर वेरिफिकेशन प्रक्रिया और बैंकिंग सुरक्षा तक कई बदलाव शामिल हैं। इन परिवर्तनों का उद्देश्य न सिर्फ ऑनलाइन फ्रॉड को रोकना है, बल्कि यूजर्स को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित वातावरण प्रदान करना भी है। यदि आप UPI पेमेंट का नियमित रूप से उपयोग करते हैं, तो इन बदलावों के बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी है ताकि किसी भी असुविधा या पेमेंट फेलियर जैसी समस्या से बचा जा सके।

UPI ट्रांजैक्शन लिमिट में बदलाव
नवंबर से लागू हुए नए नियमों के अनुसार UPI ट्रांजैक्शन लिमिट में कुछ बदलाव किए गए हैं, जिससे रोजाना लेनदेन करने वाले यूजर्स को नई सीमाओं का पालन करना होगा। कई बैंकों ने अपनी UPI लिमिट को अपडेट किया है ताकि सिस्टम पर लोड कम रहे और हाई-वॉल्यूम ट्रांजैक्शन को आसानी से संभाला जा सके। कुछ खास श्रेणियों, जैसे सरकारी पेमेंट, हेल्थकेयर और एजुकेशन से जुड़े भुगतान पर विशेष लिमिट लागू की गई है। इससे सुनिश्चित होगा कि बड़े और जरूरी लेनदेन बिना किसी रुकावट के पूरे हों। वहीं व्यक्तिगत ट्रांसफर और मर्चेंट पेमेंट की लिमिट भी अलग-अलग बैंक और ऐप के हिसाब से बदली गई है।
UPI ऐप्स पर KYC और वेरिफिकेशन प्रक्रिया सख्त
UPI यूजर्स की सुरक्षा को बढ़ाने के लिए नवंबर से KYC और वेरिफिकेशन प्रक्रिया को और सख्त बना दिया गया है। अब किसी भी नए UPI अकाउंट को एक्टिवेट करने से पहले ऐप्स अतिरिक्त पहचान सत्यापन की मांग करेंगे, जिसमें फोटो, आधार लिंकिंग और मोबाइल OTP जैसी प्रक्रियाएँ शामिल होंगी। इसका मुख्य उद्देश्य फर्जी अकाउंट्स के जरिए होने वाले फ्रॉड को रोकना है। कई पेमेंट ऐप्स ने अब स्टेप-बाय-स्टेप डिजिटल KYC शुरू कर दी है, जिससे यूजर्स आसानी से अपना अकाउंट अपडेट कर सकें।
ऑटो-पे और सब्सक्रिप्शन पेमेंट के नए नियम
ऑटो-पे से जुड़ी सेवाओं में भी नवंबर से बदलाव लागू किए गए हैं, जो खासतौर पर OTT सब्सक्रिप्शन, मोबाइल रिचार्ज, बीमा प्रीमियम और अन्य मासिक भुगतान पर असर डालेंगे। नए नियमों के अनुसार, हर बार निर्धारित सीमा से अधिक के ऑटो-पे ट्रांजैक्शन पर यूजर की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी। इससे यूजर्स को अपने खर्चों पर अधिक नियंत्रण मिलेगा और किसी भी अनचाहे कटौती से बचाव होगा। साथ ही, बैंकों द्वारा भेजे जाने वाले ऑटो-पे रिमाइंडर अब अनिवार्य कर दिए गए हैं, जिससे यूजर समय पर भुगतान की समीक्षा कर सके। इन नई व्यवस्थाओं से ऑटो-पे लेनदेन अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनेंगे।
फ्रॉड रोकथाम के लिए लागू हुई नई सुरक्षा गाइडलाइन
नवंबर में UPI लेनदेन की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए कई नई गाइडलाइंस लागू की गई हैं। इनमें संदिग्ध लेनदेन पर तुरंत अलर्ट भेजना, हाई-रिस्क ट्रांजैक्शन को अतिरिक्त OTP से वेरिफाई करना और अनजान नंबरों पर पेमेंट को अस्थायी रूप से ब्लॉक करने जैसी सुविधाएँ शामिल हैं। कई ऐप्स ने रियल-टाइम फ्रॉड मॉनिटरिंग सिस्टम को भी अपग्रेड किया है, जो किसी भी असामान्य गतिविधि का तुरंत पता लगा लेता है। यदि किसी यूजर का अकाउंट अचानक कई बार गलत पिन एंट्री दिखाता है, तो सिस्टम उसे अस्थायी तौर पर लॉक कर देगा। इन उपायों से न सिर्फ डिजिटल पेमेंट की विश्वसनीयता बढ़ेगी बल्कि यूजर्स को सुरक्षित और परेशानी-मुक्त लेनदेन का अनुभव मिलेगा।
