Railway pensioners Update – भारतीय रेलवे के पेंशनरों के लिए एक बड़ी राहत देने वाली खबर सामने आई है। अब जीवन प्रमाण-पत्र (Life Certificate) जमा करने के लिए उन्हें बैंकों या पोस्ट ऑफिस के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पहले जहां हर साल नवंबर के महीने में लाखों पेंशनरों को बैंक जाकर अपना जीवन प्रमाण-पत्र जमा करना पड़ता था, वहीं अब यह प्रक्रिया काफी आसान और सुविधाजनक हो गई है। खासकर बुजुर्ग पेंशनरों के लिए बैंक तक पहुंचना मुश्किल होता था, ऐसे में यह नई सुविधा उनके लिए बेहद फायदेमंद है। सरकार ने डिजिटल तकनीक का उपयोग करते हुए ऐसा विकल्प उपलब्ध कराया है, जिससे पेंशनर घर बैठे अपना जीवन प्रमाण-पत्र जमा कर सकते हैं।

रेलवे पेंशनरों के लिए डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र की सुविधा
रेलवे पेंशनरों के लिए डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र जमा करने की सुविधा ने पूरी प्रक्रिया को बेहद सरल और आसान बना दिया है। डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र यानी DLC को आप अपने स्मार्टफोन, लैपटॉप या कंप्यूटर के माध्यम से जमा कर सकते हैं। इसके लिए आपको केवल आधार कार्ड, मोबाइल नंबर और इंटरनेट की जरूरत होती है। ‘जीवन प्रमाण’ ऐप के माध्यम से पेंशनर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन करके कुछ मिनटों में अपना प्रमाण-पत्र भेज सकते हैं। इसके बाद प्रमाण-पत्र सीधे पेंशन डिस्बर्सिंग ऑथोरिटी यानी PDA को पहुंच जाता है और पेंशन निर्बाध रूप से जारी रहती है।
फेस ऑथेंटिकेशन से और भी आसान हुआ जीवन प्रमाण-पत्र
हाल ही में सरकार ने फेस ऑथेंटिकेशन आधारित जीवन प्रमाण-पत्र भी शुरू किया है, जिसे सबसे आसान तरीका माना जा रहा है। इस सुविधा के तहत पेंशनर को केवल अपने मोबाइल कैमरे के सामने चेहरा दिखाना होता है। सिस्टम उनका चेहरा स्कैन करके स्वतः सत्यापन करता है और प्रमाण-पत्र जमा हो जाता है। इस प्रक्रिया के लिए फिंगरप्रिंट या आईरिस स्कैन की जरूरत नहीं होती, जिससे बुजुर्गों को और राहत मिलती है। कई बार फिंगरप्रिंट मान्य न होने या मशीन द्वारा स्वीकार न किए जाने की समस्या सामने आती थी। फेस ऑथेंटिकेशन इन सभी परेशानियों को खत्म कर देता है। यह तरीका सुरक्षित होने के साथ-साथ तेज भी है, और इसे कोई भी व्यक्ति 2–3 मिनट में पूरा कर सकता है। रेलवे पेंशनरों में इस नई सुविधा को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है।
डाकघर और बैंक एजेंट भी करेंगे घर पर सुविधा उपलब्ध
उन पेंशनरों के लिए जो मोबाइल या इंटरनेट इस्तेमाल करने में सक्षम नहीं हैं, सरकार ने घर पर जीवन प्रमाण-पत्र जमा करने की सुविधा भी शुरू की है। इसके तहत डाक विभाग के पोस्टमैन या बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट आपके घर आकर बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन कर देते हैं। इस सेवा के लिए मामूली शुल्क लिया जाता है, लेकिन इसके बदले पेंशनर को बैंक या पोस्ट ऑफिस जाने से छुटकारा मिल जाता है। यह सुविधा दूरदराज के इलाकों में रहने वाले या चलने-फिरने में असमर्थ पेंशनरों के लिए बेहद उपयोगी है। घर बैठे प्रमाण-पत्र जमा होने से न केवल समय की बचत होती है, बल्कि स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी कम हो जाते हैं।
जीवन प्रमाण-पत्र जमा न करने पर क्या होता है?
जीवन प्रमाण-पत्र हर साल जमा करना पेंशनरों के लिए अनिवार्य है। यदि यह समय पर जमा नहीं किया जाए, तो पेंशन अस्थायी रूप से रोक दी जाती है। रेलवे पेंशनरों के लिए यह अवधि सामान्यतः नवंबर में होती है, लेकिन डिजिटल विकल्प आने के बाद अब कोई भी व्यक्ति साल के किसी भी महीने में डिजिटल प्रमाण-पत्र भेज सकता है। यदि किसी कारण पेंशन रुक जाती है, तो जीवन प्रमाण-पत्र जमा करते ही पेंशन फिर से बहाल हो जाती है। इसलिए यह जरूरी है कि हर पेंशनर समय पर यह प्रक्रिया पूरी करें। सरकार ने प्रक्रिया को इतना सरल बना दिया है कि अब किसी भी पेंशनर को परेशानी का सामना नहीं करना चाहिए।
