Gold Price Today – सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव हमेशा से निवेशकों के लिए चिंता और उम्मीद दोनों का कारण रहा है। वर्तमान आर्थिक स्थिति, वैशिक बाजारों की हलचल, डॉलर की मजबूती और महंगाई दरों में बदलाव जैसे कारक सोने के भाव को प्रभावित करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि 2025 के मध्य तक सोने की कीमतों में हल्की गिरावट देखने को मिल सकती है, क्योंकि वैश्विक बाजारों में स्थिरता लौटने की उम्मीद है। हालांकि, यह गिरावट लंबे समय तक नहीं रहेगी, क्योंकि सोना हमेशा सुरक्षित निवेश माना जाता है और जैसे ही बाजारों में अनिश्चितता बढ़ती है, इसकी मांग फिर तेजी पकड़ लेती है। निवेशक यदि सही समय पर सोना खरीदना चाहते हैं, तो उन्हें बाजार के रुझानों पर नजर रखनी चाहिए और छोटे-छोटे हिस्सों में निवेश की रणनीति अपनानी चाहिए ताकि जोखिम कम रहे।

सोने की कीमतों में गिरावट कब हो सकती है?
सोने की कीमतों में गिरावट आमतौर पर तब आती है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था मजबूत होती है और निवेशक जोखिम वाले बाजारों की ओर बढ़ते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ब्याज़ दरों में कमी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थिरता आने पर सोने की मांग में हल्का विराम लग सकता है। इसके अलावा, अगर डॉलर मजबूत होता है, तो भी सोने के भाव में गिरावट देखने को मिल सकती है। आने वाले महीनों में अमेरिका और यूरोप की मौद्रिक नीतियों में बदलाव से सोने की कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है। अगर महंगाई दर नियंत्रित रहती है और अर्थव्यवस्था सुधार के संकेत देती है, तो सोने की कीमतों में थोड़ी नरमी संभव है। हालांकि, यह गिरावट सीमित होगी क्योंकि सोना लंबे समय तक सुरक्षित संपत्ति के रूप में अपनी कीमत बनाए रखता है।
सोना खरीदने का सही समय और रणनीति
सोने में निवेश करते समय सही समय को पहचानना बेहद जरूरी है। कीमतों में हल्की गिरावट के दौरान चरणबद्ध निवेश यानी SIP या नियमित अंतराल पर खरीदारी एक सुरक्षित रणनीति मानी जाती है। इससे औसत खरीद मूल्य संतुलित रहता है और अचानक बढ़ी कीमतों का असर कम हो जाता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि निवेशक अपनी जरूरत और जोखिम क्षमता के अनुसार फिजिकल गोल्ड, डिजिटल गोल्ड या गोल्ड ETF में निवेश कर सकते हैं। डिजिटल और ETF में निवेश करना अधिक सुरक्षित और पारदर्शी माना जाता है, क्योंकि इसमें शुद्धता का जोखिम नहीं होता। खरीदारी से पहले सोने की अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार कीमतों की तुलना करना भी महत्वपूर्ण है।
सोना खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान
सोना खरीदते समय शुद्धता सबसे महत्वपूर्ण कारक है। हमेशा 24 कैरेट या 22 कैरेट BIS हॉलमार्क वाला सोना ही खरीदें ताकि गुणवत्ता को लेकर कोई संदेह न रहे। इसके अलावा, मेकिंग चार्ज और GST की तुलना भी जरूरी है क्योंकि अलग-अलग ज्वेलर्स के चार्ज में भारी अंतर हो सकता है। यदि आप डिजिटल गोल्ड या ETF खरीद रहे हैं, तो विश्वसनीय प्लेटफॉर्म और कम चार्ज वाली योजनाओं को प्राथमिकता दें। खरीदारी से पहले बिल लेना ना भूलें, क्योंकि यह भविष्य में बेचने के समय काम आता है।
सोने में निवेश करते समय होने वाली आम गलतियाँ
निवेशक अक्सर भाव बढ़ने पर घबराकर खरीदारी कर लेते हैं या गिरावट के दौरान बेच देते हैं, जो नुकसानदायक साबित हो सकता है। सोने में निवेश लंबी अवधि के लिए सबसे सुरक्षित माना जाता है, इसलिए जल्दबाजी से बचना चाहिए। कई बार लोग बिना तुलना किए या बिना शुद्धता जांचे सोना खरीद लेते हैं, जिससे बाद में नुकसान होता है। निवेश केवल एक ही रूप में न करें, बल्कि अपनी आवश्यकता के अनुसार फिजिकल, डिजिटल और ETF जैसे विकल्पों में संतुलित निवेश करें। इससे जोखिम कम होता है और रिटर्न बेहतर मिल सकता है।
