60+ बुजुर्गों को हर महीने ₹12500 अपने आप खाते में डालने का मॉडल — न कोई आवेदन, न बैंक की लाइन, सब कुछ आधार से अपने आप!

Aadhaar Automatically Deposit Model – 60+ बुजुर्गों को हर महीने ₹12500 अपने आप खाते में डालने का मॉडल — न कोई आवेदन, न बैंक की लाइन, सब कुछ आधार से अपने आप! यह मॉडल बुजुर्गों के आर्थिक सम्मान और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए तैयार किया जा रहा है। देश में कई बुजुर्ग ऐसे हैं जिनके पास न तो नियमित आय है और न ही परिवार से पर्याप्त सहायता मिल पाती है। ऐसे में सरकार द्वारा यह व्यवस्था बुजुर्गों के जीवन को सुरक्षित और आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। इस मॉडल में लाभार्थी को न किसी आवेदन की जरूरत होगी और न ही बैंक के चक्कर लगाने की। केवल आधार कार्ड और बैंक खाते को जोड़कर सभी भुगतान सीधे खाते में जमा होंगे। इससे बुजुर्गों को मासिक खर्च, दवाइयों और जरूरी आवश्यकताओं के लिए स्थायी आर्थिक सहायता मिल सकेगी।

Aadhaar Automatically Deposit Model
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योजना का उद्देश्य और लाभ

इस मॉडल का मुख्य उद्देश्य 60 वर्ष से अधिक आयु वाले बुजुर्गों को आर्थिक मजबूती प्रदान करना है। कई बुजुर्गों को उम्र बढ़ने के साथ काम करने में कठिनाई होती है और उनकी नियमित आय बंद हो जाती है। ऐसे समय में ₹12500 प्रति माह मिलने से उनकी जीवनशैली में सुधार आता है। यह राशि उन्हें भोजन, दवाइयाँ, कपड़े और अन्य आवश्यक जरूरतों को पूरा करने में मदद करेगी। इस योजना से बुजुर्गों में आत्मसम्मान की भावना भी बढ़ेगी क्योंकि उन्हें किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं होगी। सरकार द्वारा यह राशि सीधे आधार आधारित DBT प्रणाली के माध्यम से खाते में भेजी जाएगी, जिससे किसी प्रकार की धोखाधड़ी या कटौती की संभावना नहीं रहेगी। इस मॉडल को लागू करने से देश में सामाजिक सुरक्षा मजबूत होगी और बुजुर्गों की स्थिति में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

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आवेदन प्रक्रिया की अनुपस्थिति क्यों महत्वपूर्ण?

आमतौर पर सरकारी योजनाओं में आवेदन, सत्यापन, दस्तावेज़ और बैंक चक्कर जैसी प्रक्रियाएँ शामिल होती हैं, जो बुजुर्गों के लिए काफी कठिन हो सकती हैं। इसलिए इस मॉडल में आवेदन प्रक्रिया को पूरी तरह समाप्त किया गया है। आधार कार्ड और बैंक खाते के लिंक होने के आधार पर ही पात्रता तय हो जाएगी। इससे उन बुजुर्गों को भी लाभ मिलेगा जिन्हें कागजी प्रक्रियाओं और ऑनलाइन फ़ॉर्म भरने की जानकारी नहीं होती। यह मॉडल खासकर ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले बुजुर्गों के लिए वरदान साबित हो सकता है। आधार-आधारित पहचान से लाभार्थियों की वास्तविक संख्या का पता चलेगा और किसी भी प्रकार की फर्जीवाड़े की संभावना भी कम होगी। यह व्यवस्था सरकार के लिए भी समय और खर्च दोनों की बचत करेगी।

पैसा सीधे खाते में आने की प्रक्रिया

इस मॉडल में भुगतान सीधे बैंक खाते में भेजा जाएगा, जो आधार-आधारित भुगतान प्रणाली (ABPS) के जरिए होगा। इसमें लाभार्थी को बैंक में जाकर लाइन में लगने, पासबुक अपडेट कराने या किसी फॉर्म पर हस्ताक्षर करने की जरूरत नहीं होगी। हर महीने निर्धारित तारीख पर राशि स्वतः खाते में जमा हो जाएगी। बुजुर्ग चाहे गांव में हों या शहर में, मोबाइल के जरिए SMS अलर्ट से वे भुगतान की जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। यह सुविधा डिजिटल इंडिया अभियान को भी मजबूत बनाती है। इससे नकदी लेनदेन में कमी आएगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।

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कब लागू होगा यह मॉडल और कौन होगा पात्र?

यह मॉडल कई राज्यों में परीक्षण स्तर पर लागू किया जा चुका है और इसे राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने की तैयारी चल रही है। 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के सभी बुजुर्ग जिनके पास आधार और बैंक खाता जुड़ा है, वे स्वतः पात्र मान लिए जाएंगे। किसी प्रकार का आय प्रमाणपत्र या पात्रता प्रमाण देने की आवश्यकता नहीं होगी। ग्रामीण, शहरी या किसी भी क्षेत्र में रहने वाले सभी वरिष्ठ नागरिक इस लाभ को प्राप्त कर सकेंगे। इसके लागू हो जाने के बाद यह बुजुर्गों के लिए सबसे बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजना मानी जाएगी।

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