Oil Price Update – हाल ही में घरेलू रसोई के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। सरसों तेल और रिफाइंड के दामों में ₹25 प्रति लीटर तक की गिरावट दर्ज की गई है, जिससे आम जनता को राहत मिलने वाली है। लंबे समय से लगातार बढ़ती महंगाई के बीच यह कटौती लोगों के बजट को कुछ हद तक संभालने में मदद करेगी। बाजार रिपोर्ट्स के अनुसार, थोक और खुदरा दोनों स्तरों पर तेल की कीमतों में कमी आई है, और यह बदलाव त्योहारों के बाद की मांग में गिरावट और अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की घटती कीमतों के चलते देखा जा रहा है। उपभोक्ताओं का मानना है कि अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो आने वाले दिनों में सरसों और रिफाइंड दोनों की कीमतें और नीचे जा सकती हैं, जिससे रसोई खर्च में और भी बचत होगी।

सरसों तेल के भाव में आई बड़ी गिरावट
सरसों तेल की कीमतों में इस बार उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। पहले जहां सरसों तेल ₹160 से ₹170 प्रति लीटर के बीच बिक रहा था, अब कई जगहों पर इसका भाव ₹140 से ₹145 प्रति लीटर तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसानों द्वारा सरसों की बढ़ी हुई फसल और अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बीजों के दामों में कमी के कारण यह गिरावट देखने को मिल रही है। इसके अलावा सरकार द्वारा आयात शुल्क में ढील और स्टॉक सीमा नियंत्रण जैसे कदमों ने भी तेल की कीमतों को नीचे लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में यदि यह स्थिति बनी रहती है, तो सरसों तेल और भी सस्ता हो सकता है।
रिफाइंड तेल के दामों में भी राहत
रिफाइंड तेल की कीमतों में भी उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर है। पहले जहां रिफाइंड तेल का भाव ₹155 से ₹165 प्रति लीटर था, वहीं अब यह घटकर ₹130 से ₹135 तक पहुंच गया है। खासकर सूरजमुखी और सोयाबीन रिफाइंड की कीमतों में यह कमी देखी जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल और सोया ऑयल की कीमतों में आई गिरावट का सीधा असर भारतीय बाजारों में दिख रहा है। इस कमी से मध्यम और निम्न आय वर्ग के परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि रसोई खर्च में तेल का खर्च काफी महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।
महंगाई पर नियंत्रण में सरकार की भूमिका
सरकार लगातार खाद्य तेल की कीमतों को नियंत्रण में रखने के लिए सक्रिय है। केंद्र सरकार द्वारा तेल के आयात पर सीमा शुल्क में राहत देने और स्टॉक लिमिट नियंत्रण जैसे कदम उठाने से आपूर्ति बेहतर हुई है। इसके अलावा सरकारी एजेंसियों ने थोक विक्रेताओं पर निगरानी बढ़ाई है ताकि कृत्रिम रूप से कीमतें न बढ़ाई जा सकें। इन कदमों का असर अब बाजार में दिखने लगा है, और तेल की कीमतें धीरे-धीरे स्थिर हो रही हैं। अगर यह ट्रेंड जारी रहा तो आने वाले महीनों में उपभोक्ताओं को और सस्ता तेल मिल सकता है।
आम जनता को राहत और आगे की उम्मीदें
तेल की कीमतों में आई यह गिरावट आम जनता के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। खासकर उन परिवारों के लिए जो महंगाई के चलते बजट से जूझ रहे थे, उनके लिए यह एक सकारात्मक संकेत है। उपभोक्ताओं का कहना है कि अगर आने वाले महीनों में भी तेल के दाम इसी तरह घटते रहे तो दैनिक जरूरतों पर खर्च कम होगा और थोड़ी आर्थिक स्थिरता आएगी। विशेषज्ञों का अनुमान है कि दिसंबर तक कीमतों में और ₹5 से ₹10 प्रति लीटर की कमी देखी जा सकती है। फिलहाल बाजार में राहत का माहौल है और लोग उम्मीद कर रहे हैं कि यह राहत लंबे समय तक बनी रहेगी।
