Income Tax Notice – इनकम टैक्स नोटिस सुनते ही कई लोगों के मन में घबराहट होने लगती है, लेकिन सच यह है कि हर नोटिस डरावना या पेनाल्टी वाला नहीं होता। आयकर विभाग कई वजहों से नोटिस भेजता है, जिनमें जानकारी की पुष्टि करना, दस्तावेज़ मांगना, आय-व्यय में असमानता की जांच करना, या रिटर्न में की गई छोटी-मोटी गलतियों को ठीक करवाना शामिल है। आजकल फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन पारदर्शी होते जा रहे हैं, इसलिए बैंक, आधार, पैन, ट्रेडिंग अकाउंट, UPI जैसे कई प्लेटफॉर्म से जुड़ी जानकारी स्वतः विभाग तक पहुंच जाती है। ऐसे में यदि आपके खातों में कोई बड़ा लेनदेन होता है या रिटर्न में दर्ज आंकड़ों से मेल नहीं खाता, तो विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है। जरूरी यह है कि नोटिस को ध्यान से पढ़ें, उसकी कैटेगरी समझें और समय पर उसका जवाब दें।

इनकम टैक्स नोटिस क्या होता है?
इनकम टैक्स नोटिस दरअसल आयकर विभाग की ओर से भेजा गया एक आधिकारिक संदेश होता है जिसमें किसी वित्तीय गतिविधि की पुष्टि, स्पष्टीकरण या सुधार की मांग की जाती है। यह जरूरी नहीं कि हर नोटिस पेनाल्टी या जुर्माने से जुड़ा हो। कई बार विभाग किसी रिटर्न के डॉक्युमेंट को दोबारा वेरिफाई करना चाहता है या रिटर्न में भरी गई जानकारी किसी तीसरे स्रोत से मैच नहीं हो रही होती। इस स्थिति में विभाग करदाता को मौका देता है कि वह तथ्य स्पष्ट करे। अगर रिटर्न में कोई गलती रह गई हो या कोई डिटेल मिस हो गई हो, तो नोटिस के जरिए उसे दोबारा भरने या सुधारने की प्रक्रिया बताई जाती है।
कितने तरह के इनकम टैक्स नोटिस आते हैं?
इनकम टैक्स विभाग अलग-अलग परिस्थितियों के आधार पर कई तरह के नोटिस भेजता है। इनमें सबसे अधिक आम हैं—धारा 139(9) का नोटिस जो कि ‘डिफेक्टिव रिटर्न’ के लिए भेजा जाता है। इसके अलावा धारा 143(1) का नोटिस तब आता है जब रिटर्न में दी गई जानकारी और सिस्टम के हिसाब से मिली जानकारी में अंतर पाया जाता है। धारा 143(2) के तहत स्क्रूटनी नोटिस आता है जिसमें आपकी इनकम, खर्च, लेन-देन का विस्तृत मूल्यांकन किया जाता है। जब बड़ी रकम का लेनदेन बैंक या किसी अन्य स्रोत से रिपोर्ट होता है, तो धारा 131 या 133C के तहत भी पूछताछ हो सकती है।
इनकम टैक्स नोटिस आने के कारण
नोटिस आने की सबसे बड़ी वजह रिटर्न में दर्ज जानकारी और बैंक/आधार/पैन से जुड़े ट्रांजैक्शन में अंतर होना है। यदि आपने कोई बड़ा कैश डिपॉजिट किया है, शेयर मार्केट में हाई-वैल्यू ट्रेड किया है या किसी वर्ष में आय अचानक बढ़ गई है, तो विभाग स्पष्टीकरण मांग सकता है। कई बार करदाता गलती से गलत आंकड़े भर देते हैं, TDS mismatch हो जाता है या 26AS/ AIS में दिखाए गए आंकड़ों से सामंजस्य नहीं बैठता। ऐसे मामलों में नोटिस सिर्फ स्पष्टीकरण के लिए भेजा जाता है ताकि विभाग सुनिश्चित कर सके कि सब कुछ सही है।
इनकम टैक्स नोटिस से कैसे बचें?
इनकम टैक्स नोटिस से बचने के लिए सबसे पहले जरूरी है कि रिटर्न भरते समय सभी दस्तावेज सटीक रखें और 26AS, AIS और TIS जैसे दस्तावेजों को ध्यान से मैच करें। किसी भी बड़े लेनदेन को बैंकिंग चैनलों के जरिए ही करें और उसका रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। शेयर ट्रेडिंग, प्रॉपर्टी खरीद-फरोख्त या बिजनेस ट्रांजैक्शन से जुड़े हर दस्तावेज को संभाल कर रखना चाहिए। TDS mismatch की स्थिति न बने इसके लिए समय-समय पर फॉर्म 26AS की जांच करते रहें। आय और खर्च से जुड़े सभी बिल, इनवॉइस और कन्फर्मेशन स्टेटमेंट्स सुरक्षित रखें ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें प्रस्तुत किया जा सके।
