8th Pay Commission Salary – सरकारी कर्मचारियों के लिए 8वां वेतन आयोग इस समय चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना हुआ है। कर्मचारियों की विभिन्न यूनियनों ने सरकार से यह मांग की है कि नए वेतन आयोग में कई अहम बदलाव किए जाएं, जिनमें सबसे प्रमुख है– सैलरी कैलकुलेशन में माता-पिता को आश्रित मानते हुए अतिरिक्त लाभ देना। वर्तमान वेतन प्रणाली में आश्रितों के लिए सीमित प्रावधान हैं, जिसके कारण कई कर्मचारी अपने बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल में आर्थिक चुनौतियों का सामना करते हैं। इसलिए 8ठे वेतन आयोग में यह प्रस्ताव तेजी से समर्थन पा रहा है कि पारिवारिक संरचना में माता-पिता के खर्च को भी वेतन निर्धारण और भत्तों में शामिल किया जाए।

8वें वेतन आयोग में माता-पिता को आश्रित मानने की नई पहल
8वें वेतन आयोग में सबसे ज्यादा चर्चा इस बात पर है कि कर्मचारियों के माता-पिता को भी सैलरी स्ट्रक्चर में आधिकारिक रूप से शामिल किया जाए। कई सरकारी कर्मचारी अपने माता-पिता की देखभाल की जिम्मेदारी निभाते हैं, लेकिन उनकी आय के हिसाब से मिलने वाले भत्तों में इस जिम्मेदारी का कोई सीधा उल्लेख नहीं होता। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि यदि सैलरी कैलकुलेशन में माता-पिता को शामिल किया जाता है, तो उन्हें मेडिकल, यात्रा भत्ता और परिवार कल्याण योजनाओं में अतिरिक्त सहायता मिल सकेगी। इससे सामाजिक और पारिवारिक जिम्मेदारियों को निभाने में कर्मचारियों को वास्तविक आर्थिक मदद मिलेगी।
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कर्मचारियों की दूसरी प्रमुख मांगें: न्यूनतम वेतन और फिटमेंट फैक्टर
8वें वेतन आयोग में कर्मचारियों की दूसरी महत्वपूर्ण मांग न्यूनतम वेतन बढ़ाने की है। अभी 7वें वेतन आयोग के तहत न्यूनतम वेतन 18,000 रुपये प्रति माह है, जिसे बढ़ाकर 26,000–28,000 रुपये करने की मांग हो रही है। इसके साथ ही फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाकर 3.68 करने का प्रस्ताव भी रखा गया है, जिससे बेसिक पे में 40% से अधिक की बढ़ोतरी संभव हो सकती है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि लगातार बढ़ती महंगाई और जीवन-यापन के खर्च को देखते हुए यह बढ़ोतरी समय की मांग है। अगर सरकार इन मांगों को स्वीकार करती है, तो करोड़ों कर्मचारियों और पेंशनरों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। साथ ही यह भी उम्मीद की जा रही है कि 50% डीए के बहाल होने पर इसे बेसिक पे में मर्ज करने का रास्ता भी साफ हो सकता है।
सरकार की प्रतिक्रिया और संभावित फैसलों की दिशा
सरकारी सूत्रों के अनुसार, 8वें वेतन आयोग को लेकर प्रारंभिक स्तर पर विमर्श चल रहा है, हालांकि आधिकारिक घोषणा अभी नहीं की गई है। कर्मचारियों की मांगों पर सरकार गंभीरता से विचार कर रही है, खासकर माता-पिता को आश्रित मानने और भत्तों में सुधार से जुड़े प्रस्तावों पर। वित्त मंत्रालय इन सभी सुझावों का अध्ययन कर रहा है ताकि एक संतुलित और व्यावहारिक नीति तैयार की जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इन प्रस्तावों को लागू करती है, तो इससे कर्मचारी वर्ग को व्यापक लाभ मिलेगा और उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। हालांकि अंतिम निर्णय 2026 की संभावित समयसीमा के आसपास आने की उम्मीद है।
कर्मचारियों और पेंशनरों की उम्मीदें बढ़ीं
8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारियों और पेंशनरों की उम्मीदें लगातार बढ़ती जा रही हैं। वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में उन्हें महंगाई, स्वास्थ्य खर्च और पारिवारिक जिम्मेदारियों से निपटने के लिए अधिक वित्तीय सहायता की आवश्यकता है। ऐसे में फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने, न्यूनतम वेतन में सुधार, डीए मर्ज करने और माता-पिता को आश्रित मानने जैसे कदम उनके लिए बड़ी राहत साबित होंगे। कर्मचारी उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार इस बार अधिक मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए ऐसी नीतियां बनाएगी, जिनसे उनके जीवन स्तर में सुधार हो सके। अगर 8वां वेतन आयोग समय पर लागू हुआ, तो 2026 से उनकी सैलरी और पेंशन में बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है।
